Menu
Swachh Bharat, External Link that opens in a new window
 
मुख्य पृष्ठ >> परिचय (LC और ILAS) >>

परिचय (LC और ILAS)

श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के श्रम सम्मेलन (एलसी) अनुभाग की मुख्य गतिविधियां

  • आईएलओ के मुख्यालय जेनेवा, स्विट्जरलैंड में वार्षिक रूप से आयोजित अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) के अंतर्राष्ट्रीय लेबर कॉन्फ्रेंस में भारत के त्रिपक्षीय प्रतिनिधिमंडल की प्रतिनियुक्ति।
  • हर वर्ष मार्च, जून तथा नवम्बर में आईएलओ के गवर्निंग बॉडी की तीन बैठकों तथा अन्य क्षेत्रीय सम्मेलनों/बैठकों/तकनीकी/सेक्टोरल बैठक तथा आईएलओ के सेमिनारों में भाग लेने के लिए आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल की नियुक्ति।
  • द्विपक्षीय तथा बहुपक्षीय तकनीकी सहयोग परियोजनाओं तथा कार्यक्रम।
  • अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन द्वारा प्रस्तुत फेलोशिप प्रोग्राम पर श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अधिकारियों का विदेश में नियुक्ति।
  • माननीय श्रम मंत्री की अध्यक्षता में मित्र देशों के लिए या वहां से आने वाले प्रतिनिधिमंडलों का द्विपक्षी आदान-प्रदान/यात्रा।
  • विदेशी विनिमय में भारत के आईएलओ में वार्षिक योगदान तथा भारत में आईएलओ कार्यालय से जुड़े अन्य प्रशासनिक मामलों के लिए प्रशासनिक अनुमोदन तथा वित्तीय मंजूरी प्राप्त करना।
  • राष्ट्रीय सम्मेलनों का आयोजन करना, जैसे भारतीय श्रम सम्मेलन, स्थाई श्रम समिति तथा श्रम मंत्रियों का सम्मेलन एवं उनके निष्कर्षों पर होने वाली बाद की कार्यवाही की निगरानी।

श्रम मंत्रालय के आईएलएएस की मुख्य गतिविधियां

  • हर वर्ष मार्च, जून तथा नवम्बर में आईएलओ के गवर्निंग बॉडी की विभिन्न समितियों तथा हर वर्ष जून में अंतर्राष्ट्रीय श्रम सम्मेलन (आईएलसी) के एजेंडों से जुड़े विशेष मामलों की जांच करना तथा भारत सरकार द्वारा अपनाए जाने वाले दृष्टिकोण का निर्णय करना और भारत सरकार के प्रतिनिधियों के लिए उचित हस्तक्षेपों की तैयारी करना।
  • संबंधित केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों; राज्य सरकारों तथा सामाजिक सहयोगियों के परामर्श से आईएलओ सचिवालय द्वारा जारी मानक सेटिंग, पुनरावलोकन या वापसी से जुड़े प्रश्नावलियों की जांच करना और उन प्रश्नावलियों के लिए उचित उत्तर तैयार करना।
  • संबंधित केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों, राज्य सरकारों तथा सामाजिक सहयोगियों के परामर्श से आईएलओ द्वारा अंगीकृत किए जाने वाले प्रस्तावित प्रपत्रों की प्रारूप सामग्री की जांच करना; यह फैसला लेना कि उनकी स्वीकृति का समर्थन किया जाए या नहीं और सरकारी प्रतिनिधियों के लिए उपयुक्त हस्तक्षेपों की तैयार करना।
  • आईएलओ के अनुच्छेद 19 के तहत की बाध्यताओं को पूरा करने के लिए सूचनाओं हेतु हमारे मामले में संसद जैसे योग्य प्राधिकार के समक्ष आईएलओ द्वारा अंगीकृत प्रपत्रों को प्रस्तुत करना।
  • संबंधित केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों, राज्य सरकारों/यूटी तथा सामाजिक सहयोगियों के परामर्श से राष्ट्रीय कानूनों तथा कार्यप्रणाली के आलोक में आईएलओ द्वारा अंगीकृत संधियों तथा अनुशंसाओं की जांच करना। आईएलओ की उन संधियों का सत्यापन करना, जिनके लिए हमारे राष्ट्रीय कानूनों तथा कार्यप्रणाली के प्रावधान अनुरूप हों और उसी अनुसार आईएलओ को सरकार के फैसले से अवगत करना।
  • आईएलओ संधियों का सत्यापन एक स्वैच्छिक प्रक्रिया है। अब तक भारत द्वारा अपनाई गई कार्यप्रणाली ऐसी रही है कि किसी संधि का सत्यापन केवल तभी किया जाता है जब उस संधि के प्रावधान भारतीय कानूनों तथा कार्यप्रणालियों के अनुरूप हों। भारत ने अबतक 43 आईएलओ संधियों तथा 1 प्रोटोकोल का सत्यापन किया है। आईएलओ के असत्यापित संधियों की भी उचित अंतरालों पर हमारे राष्ट्रीय कानूनों तथा कार्यप्रणालियों के अनुरूप समीक्षा की जाती है।
  • आईएलओ के अनुच्छेद 19 के तहत इसके असत्यापित संधियों पर एक आवर्ती रिपोर्ट तैयार करना, जो राष्ट्रीय कानूनों तथा कार्यप्रणालियों की स्थितियों और साथ ही संधियों के प्रावधानों की स्थिति स्पष्ट करती है। इसी प्रकार, आईएलओ के अनुच्छेद 22 के तहत इसकी सत्यापित संधियों पर एक आवर्ती रिपोर्ट तैयार करना, देश में इन संधियों को कैसे क्रियांवित किया जा रहा है इसकी स्थिति स्पष्ट करती है। प्राथमिकता वाली संधियों पर रिपोर्ट हर दो वर्षों पर सौंपनी होती है, जबकि गैर-प्राथमिकता वाली संधियों पर रिपोर्ट हर पांच वर्षों पर सौंपनी होती है। ये रिपोर्ट हर वर्ष 1 जून से 1 सितम्बर के बीच आईएलओ को भेजी जाती है।
  • संधियों के अनुप्रयोग पर एक्सपर्ट कमेटी द्वारा प्रस्तुत प्रत्यक्ष अनुरोधों तथा अवलोकनों एवं भारत द्वारा सत्यापित विभिन्न संधियों के कई प्रावधानों के क्रियान्वयन से जुड़ी अनुशंसाओं पर उचित टिप्पणी तथा आवश्यक उत्तर तैयार करना।
  • असत्यापित कोर या हर वर्ष मूलभूत सिद्धांतों तथा कार्यस्थलों के अधिकार से जुड़े आईएलओ घोषणापत्र के फॉलोअप के तहत वार्षिक समीक्षा के अंतर्गत आईएलओ के मौलिक संधियों पर रिपोर्ट तैयार करना, जो कोर संधियों में शामिल सिद्धांतों का देश में कैसे पालन किया जा रहा है, यह संकेत करती है।
  • आईएलओ मानदंडों तथा भारत में उनकी स्थितियों से जुड़े कई मुद्दों पर सामाजिक सहयोगियों के साथ चर्चा हेतु कंवेंशन कमीटी की उचित अंतराल पर एक त्रिपक्षीय बैठक का आयोजन करना।
  • संगठन बनाने की स्वतंत्रता पर आईएलओ समिति के समक्ष भारत के विरुद्ध मामलों तथा संगठन बनाने की स्वतंत्रता तथा सामुहिक मोल-भाव के सिद्धांतों के उल्लंघनों से जुड़ी अन्य शिकायतों की जांच करना।
  • आईएलओ के एक सदस्य के रूप में भारत की अन्य बाध्यताओं से जुड़े मामलों से निपटना। उदाहरण के लिए म्यांमार जैसे मामले, डब्ल्यूटीओ जैसे यूएन निकायों की विभिन्न बैठकों में आईएलओ द्वारा विभिन्न मुद्दों पर जाहिर विचारों, नस्लवाद के खिलाफ विश्व सम्मेलन, एजिंग से जुड़ी विशेष यूएन सभा, टिकाऊ विकास से जुड़ा विश्व शिखर सम्मेलन इत्यादि पर एक ठोस राय कायम करने की जरूरत और अपने विचारों को संप्रेषित करना।
  • चयनित राज्यों/सेक्टरों में असंगठित/प्रवासी मज्दूरों के लिए बचाव तथा देखभाल सेवाओं के लिए वैश्विक कोष, मंत्रालयों/विभागों/राज्यों/यूटी, पीएसयूओ, रोजगार प्रदाताओं तथा कामगार संगठनों में नोडल अधिकारियों की नियुक्ति समेत एचआईवी/एड्स से जुड़ी राष्ट्रीय नीति तथा कार्य जगत तथा एचआईवी/एड्स की रोकथाम के लिए यूएसडीओएल समर्थित परियोजना - जो एमओएलई संस्थानों, आईएल, एनएसीओ इत्यादि के साथ एक त्रिपक्षीय प्रतिक्रिया तथा समंवय कार्य है, से जुड़े मामले देखता है।

  • G-20 से जुड़ी गतिविधियां
  • G-20 श्रम तथा रोजगार मंत्रियों की हर साल होने वाली विभिन्न आरंभिक बैठकों के एजेंडों पर मुख्य मुद्दों की जांच करना।

    नोडल मंत्रालय, संबद्ध मंत्रालयों तथा श्रम तथा रोजगार मंत्रालय के संबद्ध कार्यालयों के साथ परामर्श कर ठोस निर्णय लेना, बिंदुओं पर चर्चा करना, सूचना प्राप्त करना, हस्तक्षेप करना तथा प्रस्तुतिकरण देना।

    हर वर्ष G-20 के वित्त मंत्रियों के लिए आयोजित बैठकों हेतु इनपुट/टिप्पणियों की तैयारी करना तथा मुद्दों की जांच करना।

    G-20 की बैठकों के लिए आईएलओ को इनपुट/टिप्पणियां देना।